अपमानित हो के जीने से अच्छा मरना है। अहंकार उसी को होता है, जिसे बिना मेहनत के सब कुछ मिल जाता है, मेहनत से सुख प्राप्त करने वाला व्यक्ति, दूसरों की मेहनत का भी सम्मान करता है। बुढ़ापे मे आपको रोटी आपकी औलाद नहीं, आपके दिए हुए संस्कार ही खिलाएंगे. अच्छे समय से ज्यादा, अच्छे इंसान के साथ रिश्ता रखो, अच्छा इंसान अच्छा समय ला सकता है, अच्छा समय अच्छा इंसान नहीं ला सकता। अपमानित हो के जीने से अच्छा मरना है। मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है...