यह बेहतर है कि आप जंगल में एक पेड़ के नीचे रहें, जहां बाघ और हाथी रहते हैं, उस जगह रहकर आप फल खाएं और जलपान करें
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आप घास पर सोएं और पुराने पेड़ों की खाले पहनें. लेकिन आप अपने सगे संबंधियों में ना रहें यदि आप निर्धन हो गए है...
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ब्राह्मण एक वृक्ष के समान है. उसकी प्रार्थना ही उसका मूल है. वह जो वेदों का ज्ञान करता है वही उसकी शाखाएं हैं.वह जो पुण्य कर्म करता है वही उसके पत्ते हैं
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इसीलिए उसको अपने मूल को बचाना चाहिए. यदि मूल नष्ट हो जाता है तो शाखाएं भी ना रहेंगी और पत्ते भी.
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लक्ष्मी मेरी माता हैं. विष्णु मेरे पिता हैं. वैष्णव जन मेरे सगे सम्बन्धी हैं. तीनों लोक मेरा देश हैं.
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रात्रि के समय कितने ही प्रकार के पक्षी वृक्ष पर विश्राम करते हैं. भोर होते ही सब पक्षी दसों दिशाओं में उड़ जाते हैं. हम क्यों भला दुःख करें यदि हमारे अपने हमें छोड़कर चले गए.
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जिसके पास में विद्या है वह शक्तिशाली है. निर्बुद्ध पुरुष के पास क्या शक्ति हो सकती है? एक छोटा खरगोश भी चतुराई से मदमस्त हाथी को तालाब में गिरा देता है.