जानिए लोहार्गल क्यों है तीर्थराज

अमर उजाला

Mon, 12 September 2022

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लोहार्गल राजस्थान के झुंझुनू से 70 किलोमीटर दूर है
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लोहार्गल का मतलब है कि वह स्थान जहां लोहा गल जाए
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 पुराणों में भी लोहार्गल का जिक्र मिलता है
 
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महाभारत युद्ध के बाद कृष्ण ने पांडवों को पाप मुक्ति के लिए विभिन्न तीर्थ स्थलों पर जाने की सलाह दी
 

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श्रीकृष्ण ने कहा कि जिस तीर्थ में तुम्हारे हथियार पानी में गल जाए, वहीं पाप मुक्ति मिलेगी
 
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जब पांडवों ने लोहार्गल के सूर्यकुंड में स्नान किया तो उनके सारे हथियार गल गए
 

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उन्होंने इस स्थान की महिमा को समझ इसे तीर्थराज की उपाधि से विभूषित किया
 
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मान्यता है कि लोहार्गल में परशुराम जी ने भी पश्चाताप के लिए यज्ञ किया और पाप मुक्ति पाई थी
 
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यहां विभिन्न धार्मिक अवसरों जैसे ग्रहण, सोमवती अमावस्या और भाद्रपद अमावस्या के मौके पर मेला लगता है
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