संरक्षण की कमी से धीरे धीरे नष्ट होती बिनेका पाटन की प्रतिहार कालीन धरोहर
अमर उजाला
Sat, 19 April 2025
Image Credit : Amar ujala
मध्यप्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल का संभाग मुख्यालय सागर 17वीं शताब्दी में बसाया गया था
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इसके नामकरण का आधार बनी विशाल झील को भी सागर कहा जाता था, जिसके समीप बसायी गई बस्ती भी सागर शब्द से सम्बोधित की गई
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सागर जिले का गठन स्वतंत्रता के पश्चात पूर्व रियासती क्षेत्रों यथा धमौनी, बण्डा, राहतगढ़, गढ़ाकोटा, देवरी, गौर झामर, नाहरमऊ, शाहगढ, खुरई, रहली आदि को मिला कर किया गया
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सागर जिले के पुरातत्व का अभी तक पूर्ण रूप से आंकलन नहीं किया गया नहीं तो यह जिला भी देश के पर्यटन नक्शे में अपनी जगह बनाने में सक्षम होता
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जिले में गुप्त परमार प्रतिहार चंदेल कल्चुरी बुंदेला मराठा गौंड राजवंशों के समय की अनेक धरोहर मौजूद है
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इन ऐतिहासिक धार्मिक तथा पुरातत्व महत्व की कुछ धरोहरें सुरक्षित है तो कुछ काल के थपेड़ों तथा अनदेखी के चलते धीरे धीरे नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है तथा कुछ नष्ट हो गई है
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यह पुरातत्व स्थल मध्यप्रदेश राज्य के सागर जिले की बंडा तहसील में सागर मुख्यालय से लगभग 45 किमी दूर विनायका ग्राम में स्थित है
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सागर जिले में पुरातत्व तथा ऐतिहासिक पर्यटन की अपार संभावनाएं है लेकिन आजादी के बाद से जिले में पुरातत्व सर्वेक्षण उसके संरक्षण को लेकर ज्यादा कार्य नहीं हुए हैं
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इस क्षेत्र के ऐतिहासिक तथा पुरातत्व महत्व के स्थलों के बारे में लोग कम जानकारी रखते है, यहां आने जाने के लिए सागर तथा बंडा से बस उपलब्ध है तथा यहां अपने निजी वाहन से भी पहुंचा जा सकता है
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