उज्जैन: अनोखा गांव जहां दिवाली पर माता लक्ष्मी की नही पूर्वजों की हुई पूजा

अमर उजाला

Wed, 22 October 2025

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दिवाली के त्योहार पर माता महालक्ष्मी और भगवान श्री गणेश का पूजन अर्चन कर शुभ समृद्धि की कामना की जाती है
 
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लेकिन उज्जैन जिले में कुछ गांव ऐसे भी हैं जहां लोग दिवाली पर अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पूजन करते हैं। उनका मानना है कि पूर्वजों की पूजा से ही परिवार में सुख, समृद्धि और वंशवृद्धि होती है
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गांव मैं एक ऐसी परंपरा है जिसके तहत धनतेरस से लेकर दिवाली तक गांव के लोग गांव से बाहर नहीं जाते और किसी बाहरी व्यक्ति का चेहरा तक नहीं देखते। यहां तक की दूध भी नहीं बेचते हैं
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इस दौरान पूर्वजों के निमित तर्पण कर खीर और चूरमे का भोग लगाया गया साथ ही पूर्वजों की याद में पीपल और घास की रस्सी भी बनाई गई है जिसे नदी में विसर्जित किया गया
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यह परंपरा काफी प्राचीन है इसलिए डाबरी, सिमरोल, बरखेड़ी, रतलाम, नीमच, मंदसौर में 1000 से अधिक परिवारों ने दिवाली पर माता महालक्ष्मी की बजाय पितृ के निमित्त पूजन अर्चन किया

 
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 गांव के लोगों का कहना है कि यह परंपरा समाज में सदियों से चली आ रही है
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नागदा के ग्राम डाबरी के साथ ही मंदसौर, नीमच, रतलाम से जुड़े कहीं गांव में इस परंपरा का निर्वहन किया गया
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