अमर उजाला
Sat, 8 March 2025
होली का त्यौहार नजदीक आ रहा है, रंगों के इस त्यौहार में लोग जम कर रंग और गुलाल का इस्तेमाल करते हैं
होली पर केमिकलयुक्त गुलाल के इस्तेमाल से स्किन एलर्जी और आंखों की रोशनी जाने का खतरा रहता है, इसलिए बाजार में अब हर्बल रंग तथा गुलाल की मांग बढ़ने लगी है
लोगो की इसी मांग को ध्यान में रखते हुए सागर जिले की आजीविका मिशन स्वसहायता समूहों से जुड़ी आदिवासी महिलाएं इन दिनों हर्बल रंग गुलाल बना रही हैं
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महिलाओं ने बताया कि वह टेसू सेमल के फूलों स्थानीय वनस्पति के फूलों पेड़ की पत्तियों को सुखाकर पीसकर उनसे यह रंग तथा कृत्रिम गुलाल तैयार करती हैं
इनका यह रंग गुलाल केमिकल फ्री होने से लोगो को पसंद आता है तथा इसके प्रयोग से त्वचा, आंखों तथा अंगों पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है
यह आदिवासी महिलाएं गोबर से गौ कास्ट (गोबर की लकड़ी) कंडे तथा होली में उपयोग होने वाली माला भी बनाती है
इन महिलाओं द्वारा बनाए सभी उत्पाद लोगों को पसंद आते है और इनकी बिक्री से इनको आय की प्राप्ति भी होती है
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