क्यों देवी की तरह पूजी जाती हैं अहिल्या बाई

अमर उजाला

Fri, 26 August 2022

Image Credit : सोशल मीडिया

देवी अहिल्या बाई होलकर की आज 227 पुण्यतिथि है, 1795 में उनका निधन हो गया था

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मध्यप्रदेश के इन्दौर में हर साल उनकी याद में भाद्रपद कृष्ण चतुर्दशी के दिन अहिल्योत्सव का आयोजन किया जाता है
 

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अहिल्या बाई होलकर मालवा रियासत की महारानी थीं, उनका विवाह मल्लहार राव होलकर के पुत्र खंडेराव से 8 साल की उम्र में हुआ था
 

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पति और ससुर के निधन के बाद अहिल्या ने मालवा रियासत की बागडोर अपने हाथ में ली थी, उन्होंने महेश्वर को मालवा रियासत की राजधानी बनाया था 

 

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अहिल्या बाई कुशल नेतृत्व और न्यायप्रियता के लिए जानी जाती हैं, उनके प्रजा वत्सल व्यवहार के कारण मालवा की प्रजा उन्हें देवी की तरह पूजती थी

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अहिल्या बाई ने मालवा के साथ ही देश के कई हिस्सों में धार्मिक कार्य किए हैं, वे भगवान शंकर की अनन्य भक्त थीं, उन्होंने कई शिव मंदिरों का निर्माण कराया है
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काशी विश्वनाथ धाम से लेकर सोमनाथ मंदिर तक के निर्माण में वे भागीदार रहीं, उन्होंने कई कुंए, बावड़ियों, तालाबों और घाटों का निर्माण कराया

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उनके लोकहितकारी कार्यों के चलते देश के कई स्थानों पर देवी अहिल्या बाई की प्रतिमाएं स्थापित हैं

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