जानें MP की इकलौती रामसर साइट के बारे में भोज ताल, जिसे 2011 तक अपर लेक के नाम से जाना जाता था, एमपी की इकलौती रामसर साइट है भोज ताल भोपाल के निवासियों के लिए पीने के पानी का एक प्रमुख स्रोत है परमार राजा भोज ने 11 वीं शताब्दी में बड़े तालाब का निर्माण कराया था 2002 में अपर लेक (बड़े तालाब) को रामसर साइट घोषित किया गया था देश भर की कुल 25 रामसर साइट में भोज ताल मध्य भारत की एक मात्र रामसर साइट है करीब 1000 साल पुराना मानव निर्मित भोज ताल प्राकृतिक रूप से नम भूमि है जैव विविधता के तहत यहां करीब एक हजार प्रजाति के फ्लोरा और फौना कीट और छोटे पौधे पाए जाते हैं भोज ताल और इसके कैचमेंट एरिया में करीब 20 हजार से ज्यादा पक्षी आते हैं सालों से इसका ईको सिस्टम बरकरार है। इसमें करीब 100 से 120 सारस पक्षी भी आते हैं रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक भोज ताल का दीदार करने के लिए आते हैं भोजताल