जानें MP की इकलौती रामसर साइट के बारे में

अमर उजाला

Sun, 22 May 2022

Image Credit : सोशल मीडिया
भोज ताल, जिसे 2011 तक अपर लेक के नाम से जाना जाता था, एमपी की इकलौती रामसर साइट है
 
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भोज ताल भोपाल के निवासियों के लिए पीने के पानी का एक प्रमुख स्रोत है
 
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परमार राजा भोज ने 11 वीं शताब्दी में बड़े तालाब का निर्माण कराया था
 
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2002 में अपर लेक (बड़े तालाब) को रामसर साइट घोषित किया गया था
 
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देश भर की कुल 25 रामसर साइट में भोज ताल मध्य भारत की एक मात्र रामसर साइट है 
 
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करीब 1000 साल पुराना मानव निर्मित भोज ताल प्राकृतिक रूप से नम भूमि है
 

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जैव विविधता के तहत यहां करीब एक हजार प्रजाति के फ्लोरा और फौना कीट और छोटे पौधे पाए जाते हैं
 
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भोज ताल और इसके कैचमेंट एरिया में करीब 20 हजार से ज्यादा पक्षी आते हैं
 

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सालों से इसका ईको सिस्टम बरकरार है। इसमें करीब 100 से 120 सारस पक्षी भी आते हैं
 
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रोजाना बड़ी संख्या में पर्यटक भोज ताल का दीदार करने के लिए आते हैं
 
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