अमर उजाला
Sat, 28 August 2021
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अगर आप दिल्ली घूमने जा रहे हैं तो क़ुतुब मीनार देखना आपको कतई मिस नहीं करना चाहिए
यह ऐतिहासिक इमारत इंडो-इस्लामिक आर्किटेक्चर का बेहतरीन नमूना है
कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसका निर्माण शुरू कराया और सूफी संत कुतुबुद्दीन बख्तियार के नाम पर इसका नाम कुतुब मीनार रखा
कुतुब मीनार का निर्माण कार्य 1199 में शुरू हुआ और 1220 में ये पूरी बनकर तैयार हो गई, इसे बनने में 21 साल लगे
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कुतुब मीनार विश्व की सबसे ऊंची ईंट की इमारत है, इसकी ऊंचाई 72.5 मीटर है, इसमें 379 सीढ़ियां हैं जो शिखर तक पहुंचती हैं
. दिल्ली का लौह स्तंभ
. कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद
. अलाई दरवाजा
. इल्तुतमिश की कब्र
. अलाई मीनार
. अलाउद्दीन का मदरसा और कब्र
. इमाम जामीन की कब्र
. सेंडरसन का सन डायल
बिजली गिरने से मीनार का ऊपरी हिस्सा नष्ट हो गया था, फिरोजशाह तुगलक ने क्षतिग्रस्त हिस्से का फिर से निर्माण करवाया
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4 दिसंबर 1981 को यहां पर 45 लोगों की जान चली गई थी जिसके बाद मीनार में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई
मीनार में कई अरबी और नागरी लिपि में शिलालेख हैं, जो इसके इतिहास को बयान करते हैं
कुतुब कॉम्पलेक्स में मौजूद लौह स्तंभ 2000 साल से भी ज्यादा पुराना है, लेकिन इसमें आज तक जंग नहीं लगी है
कई बार मरम्मत का काम होने की वजह से कुतुब मीनार थोड़ी सी झुकी हुई है
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मीनार का निर्माण लाल बलुई पत्थर से किया गया है, जिसमें सुंदर शैलियों की नक्काशी और पवित्र क़ुरान की आयतें उकेरी गई हैं
कुतुब मीनार परिसर को युनेस्को विश्व धरोहर में शुमार किया गया है
हनीमून के लिए उम्दा जगह है बाली