अमर उजाला
Sun, 26 October 2025
अधिकांश लोग वायु प्रदूषण को केवल सड़कों और उद्योगों तक सीमित मानते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि हमारा घर भी कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का स्रोत बन सकता है।
शोधकर्ताओं ने पाया है कि घर के अंदर का प्रदूषण भी फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को बढ़ाता है।
इसका एक प्रमुख कारण है रेडॉन गैस। रेडॉन एक प्राकृतिक रूप से बनने वाली रेडियोधर्मी गैस है, जो मिट्टी, चट्टानों और पानी में यूरेनियम के टूटने से पैदा होती है।
यह गैस अदृश्य, गंधहीन और स्वादहीन होती है, लेकिन यह नींव की दरारों या पाइपों के छेदों से होकर घर के अंदर जमा होती रहती है।
लंबे समय तक रेडॉन के संपर्क में रहने से फेफड़ों की कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं और यह फेफड़ों के कैंसर का एक बड़ा कारण बन सकता है।
इसके अलावा, घर में इस्तेमाल होने वाले धूपबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल, पुराने पेंट, भी हवा की गुणवत्ता को खराब करते हैं, जिससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
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