World Photography Day: तस्वीरों पर कहे चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क

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कोई ख़ुशबू बदलती रही पैरहन
कोई तस्वीर गाती रही रात भर
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

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जब उस की तस्वीर बनाया करता था
कमरा रंगों से भर जाया करता था
- तहज़ीब हाफ़ी

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दिल आबाद कहाँ रह पाए उस की याद भुला देने से
कमरा वीराँ हो जाता है इक तस्वीर हटा देने से
- जलील ’आली’

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तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत
हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं
- इमाम बख़्श नासिख़

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आप ने तस्वीर भेजी मैं ने देखी ग़ौर से
हर अदा अच्छी ख़मोशी की अदा अच्छी नहीं
- जलील मानिकपुरी

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