ये कहना था उन से मोहब्बत है मुझ को
ये कहने में मुझ को ज़माने लगे हैं
- ख़ुमार बाराबंकवी
आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता
- दाग़ देहलवी
उस को आना था कि वो मुझ को बुलाता था कहीं
रात भर बारिश थी उस का रात भर पैग़ाम था
- ज़फ़र इक़बाल
हम से पूछो मिज़ाज बारिश का
हम जो कच्चे मकान वाले हैं
- अशफ़ाक़ अंजुम
Urdu Poetry: आज के चुनिंंदा शेर