Urdu Poetry: आईने पर चुनिंदा शेर

Urdu Poetry: आईने पर चुनिंदा शेर 

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क्या कोई नई बात नज़र आती है हम में
आईना हमें देख के हैरान सा क्यूँ है
- शहरयार 

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मुझ से आँख मिलाए कौन
मैं तेरा आईना हूँ
- नासिर काज़मी 

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तन्हाइयों ने तोड़ दी हम दोनों की अना!
आईना बात क रने पे मजबूर हो गया
- बशीर बद्र 

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चाहे सोने के फ़्रेम में जड़ दो
आईना झूट बोलता ही नहीं
- कृष्ण बिहारी नूर  

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जागा हुआ ज़मीर वो आईना है 'क़तील'
सोने से पहले रोज़ जिसे देखता हूँ मैं
- क़तील शिफ़ाई 

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Urdu Poetry: 'घर' के लिए शायरों के अल्फ़ाज़

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