Meena Kumari: मीना कुमारी की फ़िल्में देखीं, शायरी भी पढ़ें
हंसी थमी है इन आंखों में यूं नमी की तरह
चमक उठे हैं अंधेरे भी रौशनी की तरह
जैसे जागी हुई आंखों में, चुभें कांच के ख़्वाब
रात इस तरह, दीवानों की बसर होती है
आग़ाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता
तेरे क़दमों की आहट को ये दिल है ढूँढता हर दम
हर इक आवाज़ पर इक थरथराहट होती जाती है
हां, कोई और होगा तूने जो देखा होगा
हम नहीं आग से बच-बचके गुज़रने वाले
न इन्तज़ार, न आहट, न तमन्ना, न उमीद
ज़िन्दगी है कि यूं बेहिस हुई जाती है
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