Urdu Poetry: दरवाज़े पर कहे चुनिंदा शेर

Urdu Poetry: दरवाज़े पर कहे चुनिंदा शेर

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कौन आएगा यहाँ कोई न आया होगा
मेरा दरवाज़ा हवाओं ने हिलाया होगा
- कैफ़ भोपाली 

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दरवाज़ा खुला है कि कोई लौट न जाए
और उस के लिए जो कभी आया न गया हो
- अतहर नफ़ीस 

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हाथ मेरे भूल बैठे दस्तकें देने का फ़न
बंद मुझ पर जब से उस के घर का दरवाज़ा हुआ
- परवीन शाकिर 

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दरवाज़ा बंद देख के मेरे मकान का
झोंका हवा का खिड़की के पर्दे हिला गया
- आदिल मंसूरी  

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सामने आ कर वो क्या रहने लगा
घर का दरवाज़ा खुला रहने लगा
- अनवर शऊर

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