अमर उजाला काव्य डेस्क
किस लिए जीते हैं हम किस के लिए जीते हैं
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया
- साहिर लुधियानवी
फ़लसफ़े इश्क़ में पेश आए सवालों की तरह
हम परेशाँ ही रहे अपने ख़यालों की तरह
- सुदर्शन फ़ाकिर
कर रहा था ग़म-ए-जहाँ का हिसाब
आज तुम याद बे-हिसाब आए
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नया इक रिश्ता पैदा क्यूँ करें हम
बिछड़ना है तो झगड़ा क्यूँ करें हम
- जौन एलिया
हम ने माना कि तग़ाफ़ुल न करोगे लेकिन
ख़ाक हो जाएँगे हम तुम को ख़बर होते तक
- मिर्ज़ा ग़ालिब
Motivational Poetry: चुनिंदा प्रेरणात्मक शायरी