अमर उजाला काव्य डेस्क
उस की याद आई है साँसो ज़रा आहिस्ता चलो
धड़कनों से भी इ बादत में ख़लल पड़ता है
- राहत इंदौरी
चुपके चुपके रात दिन आँसू बहाना याद है
हम को अब तक आशिक़ी का वो ज़माना याद है
- हसरत मोहानी
तुम्हारी याद के जब ज़ख़्म भरने लगते हैं
किसी बहाने तुम्हें याद करने लगते हैं
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नहीं आती तो याद उन की महीनों तक नहीं आती
मगर जब याद आते हैं तो अक्सर याद आते हैं
- हसरत मोहानी
तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें
हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया
- बहादुर शाह ज़फ़र
Urdu Shayari: इश्क़ पर कहे चुनिंदा शेर