अमर उजाला काव्य डेस्क
गाड़ी की रफ़्तार में आई है सुस्ती
शायद अब स्टेशन आने वाला है
- ज़ुबैर अली ताबिश
शहर के ख़ाली स्टेशन पर
कोई मुसाफ़िर उतरा होगा
- नासिर काज़मी
इक उजड़े से स्टेशन पर
तू ने मुझ को छोड़ दिया था
- नासिर काज़मी
स्टेशन की ख़ामुशी जैसे
कोई अपना छूट गया है
- इरफ़ान तारीक़ ख़ान
Urdu Poetry: मौसम के बदलते मिज़ाज पर चंद शेर