Urdu Poetry: आज के चुनिंंदा शेर
देखने वाला कोई मिले तो दिल के दाग़ दिखाऊँ
ये नगरी अँधों की नगरी किस को क्या समझाऊँ
- ख़लील-उर-रहमान आज़मी
तुझे कौन जानता था मिरी दोस्ती से पहले
तिरा हुस्न कुछ नहीं था मिरी शाइरी से पहले
- कैफ़ भोपाली
सुना है उस को भी है शेर ओ शाइरी से शग़फ़
सो हम भी मोजज़े अपने हुनर के देखते हैं
- अहमद फ़राज़
शेर से शाइरी से डरते हैं
कम-नज़र रौशनी से डरते हैं
- हबीब जालिब
Urdu Poetry: परवीन शाकिर के चुनिंदा शेर