Urdu Poetry: आज के चुनिंदा 10 शेर
कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए
तुम्हारे नाम की इक ख़ूब-सूरत शाम हो जाए
- बशीर बद्र
'वसीम' देखना मुड़ मुड़ के वो उसी की तरफ़
किसी को छोड़ के जाना भी तो नहीं आया
- वसीम बरेलवी
कुछ तबीअ'त ही मिली थी ऐसी चैन से जीने की सूरत न हुई
जिस को चाहा उसे अपना न सके जो मिला उस से मोहब्बत न हुई
- निदा फ़ाज़ली
सावन एक महीने 'क़ैसर' आँसू जीवन भर
इन आँखों के आगे बादल बे-औक़ात लगे
- क़ैसर-उल जाफ़री
हमारी तरफ़ अब वो कम देखते हैं
वो नज़रें नहीं जिन को हम देखते हैं
- दाग़ देहलवी
उस दरीचे में भी अब कोई नहीं और हम भी
सर झुकाए हुए चुप-चाप गुज़र जाते है
- जावेद अख़्तर
बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
- मीर तक़ी मीर
तुम मिरे पास होते हो गोया
जब कोई दूसरा नहीं होता
- मोमिन ख़ाँ मोमिन
Gulzar Poetry: गुलज़ार के चुनिंदा शेर