अमर उजाला काव्य डेस्क
सुना है बोले तो बातों से फूल झड़ते हैं
ये बात है तो चलो बात कर के देखते हैं
- अहमद फ़राज़
अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे
मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले
- सालिम सलीम
आज देखा है तुझ को देर के बअ'द
आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
- नासिर काज़मी
आँखें जो उठाए तो मोहब्बत का गुमाँ हो
नज़रों को झुकाए तो शिकायत सी लगे है
- जाँ निसार अख़्तर
आप पहलू में जो बैठें तो सँभल कर बैठें
दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की
- जलील मानिकपुरी
Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर