Urdu Poetry: बारिश पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़
मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ
पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
- तहज़ीब हाफ़ी
तमाम रात नहाया था शहर बारिश में
वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे
- जमाल एहसानी
मैं चुप कराता हूँ हर शब उमड़ती बारिश को
मगर ये रोज़ गई बात छेड़ देती है
- गुलज़ार
याद आई वो पहली बारिश
जब तुझे एक नज़र देखा था
- नासिर काज़मी
दफ़्तर से मिल नहीं रही छुट्टी वगर्ना मैं
बारिश की एक बूँद न बे-कार जाने दूँ
- अज़हर फ़राग़
Urdu Poetry: यादों पर कहे चुनिंदा शेर