Urdu Poetry: सितारों पर कहे चुनिंदा शेर
फ़लक पे चाँद सितारे निकलते हैं हर शब
सितम यही है निकलता नहीं हमारा चाँद
- पंडित जवाहर नाथ साक़ी
आँखों से मोहब्बत के इशारे निकल आए
बरसात के मौसम में सितारे निकल आए
- मंसूर उस्मानी
वो चार चाँद फ़लक को लगा चला हूँ 'क़मर'
कि मेरे बा'द सितारे कहेंगे अफ़्साने
- क़मर जलालवी
कुछ सितारे मिरी पलकों पे चमकते हैं अभी
कुछ सितारे मिरे सीने में समाए हुए हैं
- अरशद अब्दुल हमीद
तमाम उम्र सितारे तलाश करता फिरा
पलट के देखा तो महताब मेरे सामने था
- सलीम कौसर
Urdu Poetry: दरवाज़े पर कहे चुनिंदा शेर