Urdu Poetry: मुनीर नियाज़ी के चुनिंदा शेर

Urdu Poetry: मुनीर नियाज़ी के चुनिंदा शेर 

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ग़म की बारिश ने भी तेरे नक़्श को धोया नहीं
तू ने मुझ को खो दिया मैं ने तुझे खोया नहीं 

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कौन था तू कि फिर न देखा तुझे
मिट गया ख़्वाब आँख मलते ही 

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गया तो इस तरह गया कि मुद्दतों नहीं मिला
मिला जो फिर तो यूँ कि वो मलाल में मिला मुझे  

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आदत ही बना ली है तुम ने तो 'मुनीर' अपनी
जिस शहर में भी रहना उकताए हुए रहना 

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हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने
इक ख़्वाब हैं जहाँ में बिखर जाएँ हम तो क्या 

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