अमर उजाला काव्य डेस्क
बात वो आधी रात की रात वो पूरे चाँद की
चाँद भी ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी
- परवीन शाकिर
शाम के साए बालिश्तों से नापे हैं
चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में
- गुलज़ार
वो चाँद कह के गया था कि आज निकलेगा
तो इंतिज़ार में बैठा हुआ हूँ शाम से मैं
- फ़रहत एहसास
बेचैन इस क़दर था कि सोया न रात भर
पलकों से लिख रहा था तिरा नाम चाँद पर
- अज्ञात
इक शाम सी कर रखना काजल के करिश्मे से
इक चाँद सा आँखों में चमकाए हुए रहना
- मुनीर नियाज़ी
Urdu Poetry: दिल में जोश भरते चुनिंदा शेर