Urdu Poetry: मिर्ज़ा ग़ालिब के चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क 

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कुछ तो पढ़िए कि लोग कहते हैं
आज 'ग़ालिब' ग़ज़ल-सरा न हुआ 

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ख़त लिखेंगे गरचे मतलब कुछ न हो
हम तो आशिक़ हैं तुम्हारे नाम के 

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इब्न-ए-मरयम हुआ करे कोई
मेरे दुख की दवा करे कोई 

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'ग़ालिब' न कर हुज़ूर में तू बार बार अर्ज़
ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर 

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रात दिन गर्दिश में हैं सात आसमाँ
हो रहेगा कुछ न कुछ घबराएँ क्या 

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Urdu Shayari: चुनिंदा रूमानी शेर

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