Urdu Poetry: ख़्वाबों पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़
यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
- निदा फ़ाज़ली
वो ख़्वाब जो बरसों से न चेहरा न बदन है
वो ख़्वाब हवाओं में बिखर क्यूँ नहीं जाता
- निदा फ़ाज़ली
आँखों में जो भर लोगे तो काँटों से चुभेंगे
ये ख़्वाब तो पलकों पे सजाने के लिए हैं
- जाँ निसार अख़्तर
सो गए पेड़ जाग उठी ख़ुश्बू
ज़िंदगी ख़्वाब क्यूँ दिखाती है
- जौन एलिया
अपनी ताबीर के चक्कर में मिरा जागता ख़्वाब
रोज़ सूरज की तरह घर से निकल पड़ता है
- राहत इंदौरी
Urdu Poetry: सितारों पर कहे चुनिंदा शेर