Urdu Poetry: ख़त पर लिखे शायरों के अल्फ़ाज़
ख़ुशबू जैसे लोग मिले अफ़्साने में
एक पुराना ख़त खोला अनजाने में
- गुलज़ार
प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है
नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
- हस्तीमल हस्ती
ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर
आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
- फ़ानी बदायूंनी
अंधेरा है कैसे तिरा ख़त पढ़ूँ
लिफ़ाफ़े में कुछ रौशनी भेज दे
- मोहम्मद अल्वी
क़ासिद के आते आते ख़त इक और लिख रखूँ
मैं जानता हूँ जो वो लिखेंगे जवाब में
- मिर्ज़ा ग़ालिब
Urdu Poetry: मुनीर नियाज़ी के चुनिंदा शेर