अमर उजाला काव्य डेस्क
आज मुश्किल था सँभलना ऐ दोस्त
तू मुसीबत में अजब याद आया
- नासिर काज़मी
दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला
वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाल
- अहमद फ़राज़
वो कोई दोस्त था अच्छे दिनों का
जो पिछली रात से याद आ रहा है
- नासिर काज़मी
दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले
हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
- कैफ़ भोपाली
Urdu Shayari: साहिर लुधियानवी के दार्शनिक शेर