अमर उजाला काव्य डेस्क
रात के शाने पर सर रक्खे
देख रहा है सपना चाँद
- परवीन शाकिर
अच्छा सा कोई सपना देखो और मुझे देखो
जागो तो आईना देखो और मुझे देखो
- सरवत हुसैन
कल का सपना बहुत सुहाना था
ये उदासी न कल रही होगी
- दुष्यंत कुमार
उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है
उस के सपने एक तरफ़ हैं मेरा सपना एक तरफ़
- वरुन आनन्द
तू जब मेरे घर आया था
मैं इक सपना देख रहा था
- नासिर काज़मी
Urdu Poetry: बारिश पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़