अमर उजाला काव्य डेस्क
किया तबाह तो दिल्ली ने भी बहुत 'बिस्मिल'
मगर ख़ुदा की क़सम लखनऊ ने लूट लिया
- बिस्मिल सईदी
दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है
जो भी गुज़रा है उस ने लूटा है
- बशीर बद्र
लोग भोपाल की तारीफ़ किया करते हैं
इस नगर में तो तिरे घर के सिवा कुछ भी नहीं
- कामिल बहज़ादी
अब तो ज़रा सा गाँव भी बेटी न दे उसे
लगता था वर्ना चीन का दामाद आगरा
- नज़ीर अकबराबादी
'हसरत' की भी क़ुबूल हो मथुरा में हाज़िरी
सुनते हैं आशिक़ों पे तुम्हारा करम है आज
- हसरत मोहानी
Urdu Poetry: मिर्ज़ा ग़ालिब के चुनिंदा शेर