अमर उजाला काव्य डेस्क
दिल-ए-नादाँ तुझे हुआ क्या है
आख़िर इस दर्द की दवा क्या है
- मिर्ज़ा ग़ालिब
उस से कहियो कि दिल की गलियों में
रात दिन तेरी इंतिज़ारी है
- जौन एलिया
तेरे विसाल के लिए अपने कमाल के लिए
हालत-ए-दिल कि थी ख़राब और ख़राब की गई
- जौन एलिया
दुनिया की निगाहों में भला क्या है बुरा क्या
ये बोझ अगर दिल से उतर जाए तो अच्छा
- साहिर लुधियानवी
और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया
- फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
Chandrayaan 3: चंद्रयान के लिए ख़ास दिन और चांद पर शेर