Urdu Poetry: नदी के लिए शायरों के अल्फ़ाज़

अमर उजाला काव्य डेस्क

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इक रोज़ इक नदी के किनारे मिलेंगे हम
इक दूसरे से अपना पता पूछते हुए
- शहबाज़ रिज़्वी

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उजालों की परियाँ नहाने लगीं
नदी गुनगुनाई ख़यालात की
- बशीर बद्र

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बस इसी सोच में हूँ डूबा हुआ
ये नदी कैसे पार की जाए
- राहत इंदौरी
 

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वो कुछ गहरी सोच में ऐसे डूब गया है
बैठे बैठे नदी किनारे डूब गया है
- आनिस मुईन

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हसीन चम्पई पैरों को जब से देखा है
नदी की मस्त अदाएँ बुला रही हैं तुम्हें
- साहिर लुधियानवी

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