Urdu Poetry: आंगन पर कहे चुनिंदा शेर
वो जब आएगा तो फिर उस की रिफ़ाक़त के लिए
मौसम-ए-गुल मिरे आँगन में ठहर जाएगा
- परवीन शाकिर
एक ही मुज़्दा सुब्ह लाती है
धूप आँगन में फैल जाती है
- जौन एलिया
आवारा-मिज़ाजी ने फैला दिया आँगन को
आकाश की चादर है धरती का बिछौना है
- निदा फ़ाज़ली
इक हवेली हूँ उस का दर भी हूँ
ख़ुद ही आँगन ख़ुद ही शजर भी हूँ
- तहज़ीब हाफ़ी
अच्छी नहीं है शहर के रस्तों से दोस्ती
आँगन में फैल जाए न बाज़ार देखना
- निदा फ़ाज़ली
Urdu Poetry: ख़त पर लिखे शायरों के अल्फ़ाज़