Urdu Poetry: 'बादल' पर कहे शेर
सदाओं को अल्फ़ाज़ मिलने न पाएँ
न बादल घिरेंगे न बरसात होगी
- बशीर बद्र
इस शहर के बादल तिरी ज़ुल्फ़ों की तरह हैं
ये आग लगाते हैं बुझाने नहीं आते
- बशीर बद्र
थक जाता था बादल साया करते करते
और फिर मैं बादल पे साया करता था
- तहज़ीब हाफ़ी
सुना है रात भर बरसा है बादल
मगर वो शहर जो प्यासा रहा है
- नासिर काज़मी
इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद
- परवीन शाकिर
Urdu Shayari: घर पर कहे चुनिंदा शेर