अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना
हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है
-बशीर बद्र
ऐसी प्यास और ऐसा सब्र
दरिया पानी पानी है
- विकास शर्मा राज़
अपनी मस्ती में बहता दरिया हूँ
मैं किनारा भी हूँ भँवर भी हूँ
- तहज़ीब हाफ़ी
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
- बशीर बद्र
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