अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मरूं तो मैं किसी चेहरे में रंग भर जाऊं
'नदीम' काश यही एक काम कर जाऊं
- अहमद नदीम क़ासमी
मिलते हुए दिलों के बीच और था फ़ैसला कोई
उस ने मगर बिछड़ते वक़्त और सवाल कर दिया
- परवीन शकिर
अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिस को गले लगा लिया वो दूर हो गया
- बशीर बद्र
चाँद ख़ामोश जा रहा था कहीं
हम ने भी उस से कोई बात न की
- महमूद अयाज़
Urdu Poetry: होली के त्योहार पर कहे शेर