Sardi Shayari: 'कड़ाके की ठंड' पर चुनिंदा शेर

अमर उजाला

Mon, 22 January 2024

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इतनी सर्दी है कि मैं बाँहों की हरारत माँगूँ 
रुत ये मौज़ूँ है कहाँ घर से निकलने के लिए 

~ ज़ुबैर फ़ारूक़

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मिरे सूरज आ! मिरे जिस्म पे अपना साया कर 
बड़ी तेज़ हवा है सर्दी आज ग़ज़ब की है 

~ शहरयार

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रात बेचैन सी सर्दी में ठिठुरती है बहुत 
दिन भी हर रोज़ सुलगता है तिरी यादों से 

~ अमित शर्मा मीत
 
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तेज़ धूप में आई ऐसी लहर सर्दी की 
मोम का हर इक पुतला बच गया पिघलने से 

~ क़तील शिफ़ाई
 

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सर्दी है कि इस जिस्म से फिर भी नहीं जाती 
सूरज है कि मुद्दत से मिरे सर पर खड़ा है 

~ फख्र ज़मान
 

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वो आग बुझी तो हमें मौसम ने झिंझोड़ा 
वर्ना यही लगता था कि सर्दी नहीं आई 

~ ख़ुर्रम आफ़ाक़
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Hindi Shayari: परवीन शाकिर 6 चुनिंदा शेर

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