Hug Day Poetry: गले लगा के उसे उस की आरज़ू करते

अमर उजाला काव्य डेस्क

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वो इक तिलिस्म था क़ुर्बत में उस के उम्र कटी
गले लगा के उसे उस की आरज़ू करते
- मुस्तफ़ा ज़ैदी

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अच्छा तुम्हारे शहर का दस्तूर हो गया
जिस को गले लगा लिया वो दूर हो गया
- बशीर बद्र

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हज़ार तर्क-ए-वफ़ा का ख़याल हो लेकिन
जो रू-ब-रू हों तो बढ़ कर गले लगा लेना
- फ़ारिग़ बुख़ारी

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तीखे तो हो प सच कहो उस वक़्त क्या करो
तुम को गले लगा ले अगर प्यार से कोई
- मुसहफ़ी ग़ुलाम हमदानी

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