अमर उजाला काव्य डेस्क
इजहार कर देना अगर कुछ कहना है वरना,
खामोशी उम्रभर का इंतजार बन जाती है
-अज्ञात
दिल पे कुछ और गुज़रती है मगर क्या कीजे
लफ़्ज़ कुछ और ही इज़हार किए जाते हैं
- जलील ’आली’
एक दिन कह लीजिए जो कुछ है दिल में आप के
एक दिन सुन लीजिए जो कुछ हमारे दिल में है
- जोश मलीहाबादी
इश्क़ के इज़हार में हर-चंद रुसवाई तो है
पर करूं क्या अब तबीअत आप पर आई तो है
- अकबर इलाहाबादी
साफ़ बता दे जो तू ने देखा है दिन रात
दुनिया के डर से न रख दिल में दिल की बात
- मख़मूर सईदी
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