अमर उजाला काव्य डेस्क
वफ़ा करेंगे निबाहेंगे बात मानेंगे
तुम्हें भी याद है कुछ ये कलाम किस का था
- दाग़ देहलवी
हम को उन से वफ़ा की है उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है
- मिर्ज़ा ग़ालिब
तिरे वा'दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए
कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए
- फ़ना निज़ामी कानपुरी
आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ए'तिबार किया
- गुलज़ार
Urdu Poetry: मोहब्बत में नहीं है फ़र्क़ जीने और मरने का