Urdu Poetry: यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें

अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली 

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यही है ज़िंदगी कुछ ख़्वाब चंद उम्मीदें
इन्हीं खिलौनों से तुम भी बहल सको तो चलो
- निदा फ़ाज़ली   

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तुम्हारे ख़्वाब से हर शब लिपट के सोते हैं
सज़ाएँ भेज दो हम ने ख़ताएँ भेजी हैं
- गुलज़ार 

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ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते
जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे
- इमरान-उल-हक़ चौहान 

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ख़्वाबों पर इख़्तियार न यादों पे ज़ोर है
कब ज़िंदगी गुज़ारी है अपने हिसाब में
- फ़ातिमा हसन 

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Urdu Poetry: इश्क़ कीजे फिर समझिए ज़िंदगी क्या चीज़ है

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