Urdu Poetry: ख़ुमार बाराबंकवी के शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क  

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कहीं शेर ओ नग़्मा बन के कहीं आँसुओं में ढल के
वो मुझे मिले तो लेकिन कई सूरतें बदल के 

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न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है
दिया जल रहा है हवा चल रही है 

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झुँझलाए हैं लजाए हैं फिर मुस्कुराए हैं
किस एहतिमाम से उन्हें हम याद आए हैं

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ओ जाने वाले आ कि तिरे इंतिज़ार में
रस्ते को घर बनाए ज़माने गुज़र गए 

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Urdu Poetry: उर्दू के चुनिंदा शेर

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