अमर उजाला काव्य डेस्क
कहीं शेर ओ नग़्मा बन के कहीं आँसुओं में ढल के
वो मुझे मिले तो लेकिन कई सूरतें बदल के
न हारा है इश्क़ और न दुनिया थकी है
दिया जल रहा है हवा चल रही है
झुँझलाए हैं लजाए हैं फिर मुस्कुराए हैं
किस एहतिमाम से उन्हें हम याद आए हैं
ओ जाने वाले आ कि तिरे इंतिज़ार में
रस्ते को घर बनाए ज़माने गुज़र गए
Urdu Poetry: उर्दू के चुनिंदा शेर