Urdu Poetry: काग़ज़ पर कहे चुनिंदा शेर

अमर उजाला काव्य डेस्क

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काग़ज़ में दब के मर गए कीड़े किताब के
दीवाना बे-पढ़े-लिखे मशहूर हो गया
- बशीर बद्र

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मैं कि काग़ज़ की एक कश्ती हूँ
पहली बारिश ही आख़िरी है मुझे
- तहज़ीब हाफ़ी

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जिस पर हमारी आँख ने मोती बिछाए रात भर
भेजा वही काग़ज़ उसे हम ने लिखा कुछ भी नहीं
- बशीर बद्र

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किस तरह जम्अ' कीजिए अब अपने आप को
काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के
- आदिल मंसूरी

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Urdu Poetry: आज के चुनिंदा शेर

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