अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
कुछ तो हवा भी सर्द थी कुछ था तिरा ख़याल भी
दिल को ख़ुशी के साथ साथ होता रहा मलाल भी
- परवीन शाकिर
मेरा बचपन भी साथ ले आया
गाँव से जब भी आ गया कोई
- कैफ़ी आज़मी
हम-सफ़र हो तो कोई अपना-सा
चाँद के साथ चलोगे कब तक
- शोहरत बुख़ारी
हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन
दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
- मिर्ज़ा ग़ालिब
Urdu Shayari: अपना घर आने से पहले, इतनी गलियाँ क्यूँ आती हैं