Shayari on Zindagi: बदल रहे हैं मौसम के मिजाज़, ये शेर पढ़ें आज

अमर उजाला काव्य डेस्क

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तुम्हारे साथ ये मौसम फ़रिश्तों जैसा है
तुम्हारे बा'द ये मौसम बहुत सताएगा
- बशीर बद्र 

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यारो नए मौसम ने ये एहसान किए हैं
अब याद मुझे दर्द पुराने नहीं आते
- बशीर बद्र

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सभी मौसम हैं दस्तरस में तिरी
तू ने चाहा तो हम हरे रहेंगे
- तहज़ीब हाफ़ी

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कैसा मौसम है कुछ नहीं खुलता
बूँदा-बाँदी भी धूप भी है अभी
- अहमद फ़राज़

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Life Poetry: ज़िंदगी की सच्चाई से रूबरू करवाते शेर

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