बशीर बद्र के शेर- रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे

अमर उजाला

Mon, 19 May 2025

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गुलाबों की तरह शबनम में अपना दिल भिगोतें हैं 
मोहब्बत करने वाले ख़ूबसूरत लोग होते हैं

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उर्दू अदब

वो इंतिज़ार की चौखट पे सो गया होगा 
किसी से वक़्त तो पूछें कि क्या बजा होगा 

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ये परिंदे भी खेतों के मज़दूर हैं 
लौट के अपने घर शाम तक जाएँगे 

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तहज़ीब के लिबास उतर जाएँगे जनाब 
डॉलर में यूँ नचाएगी इक्कीसवीं सदी 
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ग़ज़लों का हुनर अपनी आँखों को सिखाएँगे 
रोएँगे बहुत लेकिन आँसू नहीं आएँगे 

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Urdu Poetry: हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए

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