अमर उजाला काव्य डेस्क, नई दिल्ली
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
- तहज़ीब हाफ़ी
इक साल गया इक साल नया है आने को
पर वक़्त का अब भी होश नहीं दीवाने को
- इब्न-ए-इंशा
तू नया है तो दिखा सुब्ह नई शाम नई
वर्ना इन आँखों ने देखे हैं नए साल कई
- फ़ैज़ लुधियानवी
किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए
कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है
- ऐतबार साजिद
यकुम जनवरी है नया साल है
दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है
- अमीर क़ज़लबाश
कुछ ख़ुशियाँ कुछ आँसू दे कर टाल गया
जीवन का इक और सुनहरा साल गया
- अज्ञात
Goodbye 2024 Welcome 2025: दिसम्बर आज मिलने जा रहा है जनवरी से