अमर उजाला
Tue, 19 August 2025
पानी में अक्स और किसी आसमाँ का है
ये नाव कौन सी है ये दरिया कहाँ का है
~अहमद मुश्ताक़
कोशिश भी कर उमीद भी रख रास्ता भी चुन
फिर इस के ब'अद थोड़ा मुक़द्दर तलाश कर
~ निदा फ़ाज़ली
यक़ीन हो तो कोई रास्ता निकलता है
हवा की ओट भी ले कर चराग़ जलता है
~ मंज़ूर हाशमी
हार हो जाती है जब मान लिया जाता है
जीत तब होती है जब ठान लिया जाता है
~ शकील आज़मी
Urdu Poetry: हवा की डोर में टूटे हुए तारे पिरोती है